नई दिल्ली. सीएमई (Coronal Mass Ejections) प्रेरित सौर तूफान (Solar Storm) बुधवार को पृथ्वी से टकरा गया. सीएमई नाम का सौर तूफान सामान्य से अधिक तीव्र होते हैं और वैज्ञानिक इसके प्रभाव को लेकर चिंतित थे. यह आखिरकार बुधवार, 4 जनवरी को सुबह 8.24 बजे पृथ्वी के मैग्नेटोस्फीयर से टकराया, जिसके परिणामस्वरूप उग्र चुंबकीय प्रवाह (Magnetic Flux) हुआ. टक्कर इतनी जोरदार थी कि एक ऑस्ट्रेलियाई उपग्रह अपने पथ से भटक गया. यदि यह अपनी स्थिति पर फिर से वापस नहीं लौटता है तो यह हमेशा के लिए खो सकता है.
इस घटना की रिपोर्ट spaceweather.com द्वारा की गई थी, जिसने अपनी वेबसाइट पर नोट किया था. जैसा कि भविष्यवाणी की गई थी कि 4 जनवरी को एक कोरोनल मास इजेक्शन पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराया. प्रभाव ने दुनिया भर के मैग्नेटोमीटर को झटका दिया, जिससे ऑस्ट्रेलिया के कैनवरा स्टेशन पर 38 nT Deviation हुआ. लेकिन सब खत्म नहीं हुआ है. यह अनुमान लगाया गया है कि आने वाले घंटों में आगे जी-1 श्रेणी के सौर तूफान की सक्रियता देखी जा सकती है.
हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक बीते मंगलवार को यह बताया गया था कि 30 दिसंबर को विस्फोट के दौरान सूर्य से निकलने वाले कोरोनल मास इजेक्शन पृथ्वी की ओर बढ़ रहे थे और जब यह हम तक पहुंचे तो बड़े पैमाने पर सौर तूफान की घटना होने वाली थी. पृथ्वी आज पेरीहीलियन (Perihelion) बिंदू पर जा पहुंची है, जहां से वो सूर्य के सबसे नजदीक है. पेरीहीलियन पृथ्वी की कक्षा में वह बिंदू है, जिस पर पृथ्वी सूर्य की सबसे नजदीक होती है. यह घटना साल में केवल एक बार होती है.
पृथवी जब सूर्य से सबसे नजदीक बिंदू पर होगी तब कोरोनल मास इजेक्शन नामक सौर कणों का तूफान धरती के चुंबकीय क्षेत्र में प्रवेश करेगा. इसके चलते रेडियो ब्लैकआउट की समस्या हो सकती है और धरती पर रंगीन अरोरा देखने को मिल सकती है.
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Tags: Earth, Solar Storm
FIRST PUBLISHED : January 05, 2023, 05:30 IST